Tuesday, August 18, 2020

१३. लोकवग्गो

१६७.

हीनं धम्मं न सेवेय्य, पमादेन न संवसे।

मिच्छादिट्ठिं न सेवेय्य, न सिया लोकवड्ढनो॥

निकृष्ट धर्म का अनुसरण न करें, प्रमाद (असावधानी, धर्म से च्युत होना) में संलिप्त न हों, मिथ्या दृष्टि (झूठा दर्शन) न अपनाएँ, संसार न बढ़ाएँ।

Don't associate with lowly qualities.

Don't consort with heedlessness.

Don't associate with wrong views.

Don't busy yourself with the world.

 

१६८.

उत्तिट्ठे नप्पमज्‍जेय्य, धम्मं सुचरितं चरे।

धम्मचारी सुखं सेति, अस्मिं लोके परम्हि च॥

उठो, प्रमाद न करो, सुचरित धर्म के अनुसार आचरण करो, जो धर्म का आचरण करता है वह इस लोक और परलोक दोनों जगह सुख पाता है।

Get up! Don't be heedless.

Live the Dhamma well.

One who lives the Dhamma

         sleeps with ease

in this world & the next.

 

१६९.

धम्मं चरे सुचरितं, न नं दुच्‍चरितं चरे।

धम्मचारी सुखं सेति, अस्मिं लोके परम्हि च॥

 

सुचरित (अच्छे) धर्म का अनुसरण करें, दुश्चरित (दुराचरण) को न अपनाएँ, धर्माचरण करने वाला इस लोक और परलोक में चैन की नींद सोता है।

 

Live the Dhamma well.

Don't live it badly.

One who lives the Dhamma

         sleeps with ease

in this world & the next.

 

१७०.

यथा पुब्बुळकं [पुब्बुळकं (सी॰ पी॰)] पस्से, यथा पस्से मरीचिकं।

एवं लोकं अवेक्खन्तं, मच्‍चुराजा न पस्सति॥

 

जो इस लोक को एक बुलबुले की तरह और एक मरीचिका जैसा देखते हैं, उन्हें मृत्यु का राजा नहीं देखता।

 

See it  as a bubble,

see it  as a mirage:

one who regards the world this way

the King of Death doesn't see.

 

१७१.

एथ पस्सथिमं लोकं, चित्तं राजरथूपमं।

यत्थ बाला विसीदन्ति, नत्थि सङ्गो विजानतं॥

आओ, इस लोक को देखो, कैसे एक राजरथ की तरह सुसज्जित है। इसे देखकर मूढ़ आसक्त होते हैं, ज्ञानी नहीं ।

 

Come look at this world

all decked out

like a royal chariot,

where fools plunge in,

while those who know

         don't cling.

 

१७२.

यो च पुब्बे पमज्‍जित्वा, पच्छा सो नप्पमज्‍जति।

सोमं लोकं पभासेति, अब्भा मुत्तोव चन्दिमा॥

जो पहले प्रमाद करता है, बाद में प्रमाद नहीं करता, वह मेघमुक्त चन्द्रमा की तरह इस लोक को आलोकित करता है।

Who once was heedless,

but later is not,

         brightens the world

         like the moon set free from a cloud.

 

१७३.

यस्स पापं कतं कम्मं, कुसलेन पिधीयति [पितीयति (सी॰ स्या॰ पी॰)]

सोमं लोकं पभासेति, अब्भा मुत्तोव चन्दिमा॥

जो अपने द्वारा किये गये पाप कर्मों को कुशल कर्मों से ढक लेता है, वह मेघमुक्त चन्द्रमा की तरह संसार को आलोकित करता है ।

 

His evil-done deed

is replaced with skillfulness:

         he brightens the world

         like the moon set free from a cloud.

 

१७४.

अन्धभूतो [अन्धीभूतो (क॰)] अयं लोको, तनुकेत्थ विपस्सति।

सकुणो जालमुत्तोव, अप्पो सग्गाय गच्छति॥

 

यह लोक अन्धा है, इसमें इक्के-दुक्के लोग ही देख पाते हैं। जाल से छूटे पंछी की भाँति विरला ही स्वर्ग जाता है ।

 

Blinded this world —

how few here see clearly!

Just as birds who've escaped

         from a net are

         few, few

         are the people

who make it to heaven.

 

१७५.

हंसादिच्‍चपथे यन्ति, आकासे यन्ति इद्धिया।

नीयन्ति धीरा लोकम्हा, जेत्वा मारं सवाहिनिं [सवाहनं (स्या॰ क॰)]

 

हंस आदित्य (सूर्य) के पथ से जाते हैं, योगी ऋद्धि-सिद्धि के बल से आकाश मार्ग से जाते हैं। धीर पुरूष इस लोक से मार की सेना को पराजित करने के बाद ले जाये जाते हैं।

Swans fly the path of the sun;

those with the power fly through space;

the enlightened flee from the world,

having defeated the armies of Mara.

 

 

१७६.

एकं धम्मं अतीतस्स, मुसावादिस्स जन्तुनो।

वितिण्णपरलोकस्स, नत्थि पापं अकारियं॥

 

जो झूठ बोलते हैं, जो केवल इस एक धर्म (सच बोलने के धर्म )  का अतिक्रमण करते हैं, उसने परलोक की चिन्ता छोड़ दी है, उसके लिए कोई भी पाप अकरणीय नहीं है।

The person who tells a lie,

who transgresses in this one thing,

transcending concern for the world beyond:

         there's no evil

         he might not do.

 

१७७.

 वे कदरिया देवलोकं वजन्ति, बाला हवे नप्पसंसन्ति दानं।

धीरो च दानं अनुमोदमानो, तेनेव सो होति सुखी परत्थ॥

 

जो कृपण (कंजूस) हैं, वे देवलोक नहीं जाते, मूर्ख दान की प्रशंसा नहीं करते, धीर पुरुष दान का अनुमोदन करते हैं। जो दान देता है वह परलोक में सुख पाता है।

No misers go

to the world of the devas.

Those who don't praise giving

                are fools.

The enlightened

express their approval for giving

         and so find ease

         in the world beyond.

 

१७८.

पथब्या एकरज्‍जेन, सग्गस्स गमनेन वा।

सब्बलोकाधिपच्‍चेन, सोतापत्तिफलं वरं॥

 इस पृथ्वी पर एकछत्र राज्य, स्वर्ग गमन, सभी लोकों पर  आधिपत्य से भी श्रेष्ठतर है स्रोतापत्ति फल।

( जब कोई व्यक्ति निर्वाण की ओर ले जाने वाले मार्ग में इस दृढ़निश्चय के साथ अग्रसर हो कि उसे किसी भी तरह पथभ्रष्ट नहीं किया जा सकता, तो यह माना जाता है कि उसे स्रोतापत्ति फल मिल गया है। ऐसे व्यक्ति को स्रोतापन्न कहा जाता है।)

 

Sole dominion over the earth,

going to heaven,

lordship over all worlds:

         the fruit of stream-entry

         excels them.

 

 

 

लोकवग्गो तेरसमो निट्ठितो।

 

Lokavagga: Worlds" (Dhp XIII), translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight (BCBS Edition), 30 November 2013,

 

हिन्दी अनुवाद: राजीव 

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