Friday, December 14, 2012

अप्पमादवग्गो



२१.
अप्पमादो अमतपदं [अमतं पदं (क॰)], पमादो मच्‍चुनो पदं।
अप्पमत्ता न मीयन्ति, ये पमत्ता यथा मता॥

अप्रमाद (हमेशा होश में रहना, जागरूक रहना, गलती न करना) अमरत्व का पथ है। प्रमाद मृत्यु का पथ है। जो अप्रमत्त हैं, वे नहीं मरते। जो प्रमत्त हैं. वे मृत समान हैं।
Heedfulness: the path to the Deathless. Heedlessness: the path to death. The heedful do not die. The heedless are as if already dead.
२२.
एवं [एतं (सी॰ स्या॰ कं॰ पी॰)] विसेसतो ञत्वा, अप्पमादम्हि पण्डिता।
अप्पमादे पमोदन्ति, अरियानं गोचरे रता॥

जो ज्ञानी हैं वे इस अप्रमाद के महत्व को विशेष रूप से समझते हुए अप्रमाद
में ही प्रसन्न रहते हैं। यही श्रेष्ठ जनों की मनोभूमि है- जिसमें वे निमग्न रहते हैं।
Knowing this as a true distinction,
those wise in heedfulness
rejoice in heedfulness,
enjoying the range of the noble ones.

२३.
ते झायिनो साततिका, निच्‍चं दळ्हपरक्‍कमा।
फुसन्ति धीरा निब्बानं, योगक्खेमं अनुत्तरं॥

धीर व्यक्ति  दृढ़ पराक्रम के साथ नित्य निरन्तर ध्यान में रहते हुए निर्वाण का स्पर्श करते हैं जो एक अनुत्तर (अनुपम) मुक्ति की स्थिति है। 
The enlightened, constantly absorbed in jhana, persevering, firm in their effort: they touch Unbinding, the unexcelled rest from the yoke.

२४.
उट्ठानवतो सतीमतो [सतिमतो (सी॰ स्या॰ क॰)], सुचिकम्मस्स निसम्मकारिनो।
सञ्‍ञतस्स धम्मजीविनो, अप्पमत्तस्स [अपमत्तस्स (?)] यसोभिवड्ढति॥

जो प्रगति की ओर अभिमुख हैं, जो जागरूक हैं, जिनके कर्म पवित्र हैं, जो सभी कर्म विचार पूर्वक करते हैं, जो संयत हैं, जो धर्म का जीवन जीते हैं और जो अप्रमत्त हैं, उनके यश में अभिवृद्धि होती है।

Those with initiative, mindful, clean in action, acting with due consideration, heedful, restrained, living the Dhamma: their glory grows.
२५.
उट्ठानेनप्पमादेन , संयमेन दमेन च।
दीपं कयिराथ मेधावी, यं ओघो नाभिकीरति॥

उत्साह और लगन से, अप्रमाद से, संयम और नियंत्रण से मेधावी व्यक्ति एक द्वीप बनाते हैं जिसे (विकारों का) कोई सैलाब नहीं डुबा सकता। 
Through initiative, heedfulness, restraint, & self-control, the wise would make an island no flood can submerge.
२६.
पमादमनुयुञ्‍जन्ति, बाला दुम्मेधिनो जना।
अप्पमादञ्‍च मेधावी, धनं सेट्ठंव रक्खति॥

मूर्ख और मंदबुद्धि प्रमाद में रत रहते हैं, जबकि मेधावी अप्रमाद की रक्षा श्रेष्ठ धन के रूप में करते हैं। 
They're addicted to heedlessness — dullards, fools — while one who is wise cherishes heedfulness as his highest wealth.
२७.
मा पमादमनुयुञ्‍जेथ, मा कामरतिसन्थवं [सन्धवं (क)]
अप्पमत्तो हि झायन्तो, पप्पोति विपुलं सुखं॥

प्रमाद में रत मत रहो। काम सुख से सन्धि मत करो। जो अप्रमत्त हैं, वे ध्यानस्थ होकर विपुल सुख प्राप्त करते हैं।
Don't give way to heedlessness or to intimacy with sensual delight — for a heedful person, absorbed in jhana, attains an abundance of ease.
२८.
पमादं अप्पमादेन, यदा नुदति पण्डितो।
पञ्‍ञापासादमारुय्ह, असोको सोकिनिं पजं।
पब्बतट्ठोव भूमट्ठे [भुम्मट्ठे (सी॰ स्या॰)], धीरो बाले अवेक्खति॥

जब ज्ञानी अप्रमाद से प्रमाद को दूर भगाता है, तब प्रज्ञा के ऊँचे भवन में आरोहण कर शोक मुक्त होकर दु:खी समुदाय को इस प्रकार देखता है जैसे कोई धीर पुरुष पर्वत की ऊँचाई पर पहुँच कर नीचे छूट गई भीड़ को देखता है।
When the wise person drives out heedlessness with heedfulness, having climbed the high tower of discernment, sorrow-free, he observes the sorrowing crowd — as the enlightened man, having scaled a summit, the fools on the ground below.
२९.
अप्पमत्तो पमत्तेसु, सुत्तेसु बहुजागरो।
अबलस्संव सीघस्सो, हित्वा याति सुमेधसो॥

बुद्धिमान व्यक्ति प्रमत्तों के बीच अप्रमत्त होकर, निद्रानिमग्न लोगों के बीच अत्यंत जाग्रत होकर जीता है, ठीक वैसे ही जैसे दुर्बल अश्वों को पीछे छोड़कर तेज गति से दौड़नेवाला अश्व आगे निकल जाता है।
Heedful among the heedless, wakeful among those asleep, just as a fast horse advances, leaving the weak behind: so the wise.
३०.
अप्पमादेन मघवा, देवानं सेट्ठतं गतो।
अप्पमादं पसंसन्ति, पमादो गरहितो सदा॥

अप्रमाद के कारण इन्द्र देवताओं में श्रेष्ठ बना। हमेशा अप्रमाद की बड़ाई की जाती है, जबकि प्रमाद को गर्हित माना जाता है।
Through heedfulness, Indra won to lordship over the gods. Heedfulness is praised, heedlessness censured — always.

३१.
अप्पमादरतो भिक्खु, पमादे भयदस्सि वा।
संयोजनं अणुं थूलं, डहं अग्गीव गच्छति॥

जो भिक्षु अप्रमाद में रत रहकर प्रमाद से डरते हैं, वह अग्नि के  समान छोटे-बड़े बंधनों को जलाते हुए आगे बढ़ते हैं।
The monk delighting in heedfulness, seeing danger in heedlessness, advances like a fire, burning fetters great & small.
३२.
अप्पमादरतो भिक्खु, पमादे भयदस्सि वा।
अभब्बो परिहानाय, निब्बानस्सेव सन्तिके॥

जो भिक्षु अप्रमाद में रत रहकर प्रमाद से डरते हैं, वे प्राप्त ऊँचाई से नीचे नहीं गिरते। वे निर्वाण के अत्यंत निकट हैं।


The monk delighting in heedfulness, seeing danger in heedlessness — incapable of falling back — stands right on the verge of Unbinding.
अप्पमादवग्गो दुतियो निट्ठितो।
"Appamadavagga: Heedfulness" (Dhp II), translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight, 29 April 2012,
हिन्दी अनुवाद:राजीव

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