मत्तासुखपरिच्चागा , पस्से चे विपुलं सुखं।
चजे मत्तासुखं धीरो, सम्पस्सं विपुलं सुखं॥
यदि अल्प सुख का परित्याग करने से विपुल सुख दिखता हो, तो धीर पुरुष विपुल सुख देखते हुए अल्प सुख छोड़ता है।
If, by forsaking
a limited ease,
he would see
an abundance of ease,
the enlightened man
would forsake
the limited ease
for the sake
of the abundant.
परदुक्खूपधानेन, अत्तनो [यो अत्तनो (स्या॰ पी॰ क॰)] सुखमिच्छति।
वेरसंसग्गसंसट्ठो, वेरा सो न परिमुच्चति॥
जो दूसरे को दु:ख देकर अपना सुख चाहता है, वह वैर भावना से संलिप्त होने के कारण वैर से मुक्त नहीं हो पाता।
He wants his own ease
by giving others dis-ease.
Intertwined in the inter-
action of hostility,
from hostility
he's not set free.
यञ्हि किच्चं अपविद्धं [तदपविद्धं (सी॰ स्या॰)], अकिच्चं पन कयिरति।
उन्नळानं पमत्तानं, तेसं वड्ढन्ति आसवा॥
जो कर्तव्य है वह नहीं करता, लेकिन जो अकरणीय है, उसे बार-बार करता है। ऐसे मल से भरे प्रमादी पुरुष के आस्रव बढ़ते हैं।
In those who
reject what should,
& do what shouldn't be done
— heedless, insolent —
effluents grow.
येसञ्च सुसमारद्धा, निच्चं कायगता सति।
अकिच्चं ते न सेवन्ति, किच्चे सातच्चकारिनो।
सतानं सम्पजानानं, अत्थं गच्छन्ति आसवा॥
जो हमेशा अपनी काया के सम्बन्ध में स्मृति रखते हैं ( अर्थात् वे हमेशा याद रखते हैं कि उनकी काया से दुराचरण नहीं हो रहा है ), जो अकरणीय है, उसे नहीं करते और निरन्तर करणीय कार्य में लगे रहते हैं, ऐसे स्मृतिवान और सचेत व्यक्ति के आस्रव नष्ट होते हैं।
But for those who
are well-applied, constantly,
to mindfulness immersed in the body;
don't indulge
in what shouldn't be done
& persist
in what should
— mindful, alert —
effluents come to an end.
मातरं पितरं हन्त्वा, राजानो द्वे च खत्तिये।
रट्ठं सानुचरं हन्त्वा, अनीघो याति ब्राह्मणो॥
माता(तृष्णा), पिता (अहंकार), दो क्षत्रिय राजाओं ( दो दर्शन- शाश्वतवाद और जड़वाद ) उनके अनुचर (राग) सहित पूरे राष्ट्र (रूप,विज्ञान आदि )को मारकर ब्राह्मण निष्पाप बनता है।
Having killed mother & father,
two warrior kings,
the kingdom & its dependency —
the brahman, untroubled, travels on.
मातरं पितरं हन्त्वा, राजानो द्वे च सोत्थिये।
वेयग्घपञ्चमं हन्त्वा, अनीघो याति ब्राह्मणो॥
माता, पिता, दो श्रोत्रीय राजाओं ( दो चरम दृष्टिकोण)और पाँचवें बाघ ( पाँच मानसिक बाधाएँ) को मारकर ब्राह्मण निष्पाप बनता है।
Having killed mother & father,
two learned kings,
&, fifth, a tiger —
the brahman, untroubled, travels on.
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, निच्चं बुद्धगता सति॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनकी स्मृति बुद्ध में बनी रहती है( अर्थात् उन्हें बुद्ध की शिक्षा का हमेशा ख़्याल रहता है।)
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose mindfulness, both day & night,
is constantly immersed
in the Buddha.
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, निच्चं धम्मगता सति॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनकी स्मृति धर्म में बनी रहती है( अर्थात् उन्हें धर्म का हमेशा ख़्याल रहता है।)
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose mindfulness, both day & night,
is constantly immersed
in the Dhamma
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, निच्चं सङ्घगता सति॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनकी स्मृति संघ में बनी रहती है( अर्थात् उन्हें संघ का हमेशा ख़्याल रहता है।)
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose mindfulness, both day & night,
is constantly immersed
in the Sangha.
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, निच्चं कायगता सति॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनकी स्मृति काया में बनी रहती है( अर्थात् उन्हें काया से किये जानेवाले आचरण का हमेशा ख़्याल रहता है।)
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose mindfulness, both day & night,
is constantly immersed
in the body.
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, अहिंसाय रतो मनो॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनका मन अहिंसक रहता है।
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose hearts delight, both day & night,
in harmlessness.
सुप्पबुद्धं पबुज्झन्ति, सदा गोतमसावका।
येसं दिवा च रत्तो च, भावनाय रतो मनो॥
गौतम के शिष्य सुप्रबुद्ध हैं, वे हमेशा सजग रहते हैं, दिन रात उनका मन भावना ( मन को उच्चतर स्थिति में रखने के लिए किया गया प्रयास, ध्यान आदि) में लगा रहता है।
They awaken, always wide awake:
Gotama's disciples
whose hearts delight, both day & night,
in developing the mind.
दुप्पब्बज्जं दुरभिरमं, दुरावासा घरा दुखा।
दुक्खोसमानसंवासो, दुक्खानुपतितद्धगू।
तस्मा न चद्धगू सिया, न च [तस्मा न चद्धगू न च (क॰)] दुक्खानुपतितो सिया [दुक्खानुपातितो (?)]॥
कठिन संन्यास अपनाने में कष्ट है, न रहने योग्य घर में रहना दुखद है, असमान के साथ रहना कष्टकर है, पथिक बने रहने में दुख है, इसलिए पथिक न बनें, दुखी न रहें।
Hard is the life gone forth,
hard to delight in.
Hard is the miserable
householder's life.
It's painful to stay with dissonant people,
painful to travel the road.
So be neither traveler
nor pained.
सद्धो सीलेन सम्पन्नो, यसोभोगसमप्पितो।
यं यं पदेसं भजति, तत्थ तत्थेव पूजितो॥
श्रद्धा और शील से सम्पन्न यश और भोग से युक्त पुरुष जहाँ भी जाता है, वहाँ आदर पाता है।
The man of conviction
endowed with virtue,
glory, & wealth:
wherever he goes
he is honored.
दूरे सन्तो पकासेन्ति, हिमवन्तोव पब्बतो।
असन्तेत्थ न दिस्सन्ति, रत्तिं खित्ता यथा सरा॥
सन्त दूर से ही आलोकित करते हैं, जैसे हिमाच्छादित पर्वत , जबकि असन्त (दुर्जन) रात में फेंके गये वाण की तरह नज़दीक में भी नहीं दिखते।
The good shine from afar
like the snowy Himalayas.
The bad don't appear
even when near,
like arrows shot into the night.
एकासनं एकसेय्यं, एको चरमतन्दितो।
एको दमयमत्तानं, वनन्ते रमितो सिया॥
अकेला बैठे, अकेला सोये, अकेला ही विचरण करे, वन में अकेले अपना दमन कर रमण करे।
Sitting alone,
resting alone,
walking alone,
untiring.
Taming himself,
he'd delight alone —
alone in the forest.
पकिण्णकवग्गो एकवीसतिमो निट्ठितो।
English translation: Pakinnakavagga: Miscellany" (Dhp XXI), translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight (BCBS Edition), 30 November 2013, http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.21.than.html
हिन्दी अनुवाद: राजीव
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