३८३. छिंद सोतं परक्कम्म, कामे पनुद ब्राह्मण
सङ्खारानं खयं ञत्वा, अकतञ्ञूसि ब्राह्मण.
हे ब्राह्मण, तृष्णा के स्रोत का छेदन कर, पराक्रम कर, कामनाओं को भगाओ, संस्कारों का क्षय कैसे होता है, जानकर अकृत (निर्वाण) जाननेवाला बनो।
Having striven, brahman,
cut the stream.
Expel sensual passions.
Knowing the ending of fabrications,
brahman,
you know the Unmade.
३८४. यदा द्वयेसु धम्मेसु, पारगू होति ब्राह्मणो
अथस्स सब्बे संयोगो, अत्थं गच्छन्ति जानतो.
जब ब्राह्मण दो धर्मों( चित्त संयम और भावना) में पारंगत हो जाता है, तो उस ज्ञानी के सारे संयोग (बन्धन ) नष्ट हो जाते हैं।
When the brahman has gone
to the beyond of two things,
then all his fetters
go to their end —
he who knows.
३८५. यस्स पारं अपारं वा, पारापारं न विज्जति
वीतद्दरं विसंयुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसका पार, अपार या पारापार नहीं है, जो निर्भय है और अनासक्त है मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।
One whose beyond or
not-beyond or
beyond-&-not-beyond
can't be found;
unshackled, carefree:
he's what I call
a brahman.
३८६. झायिं विरजमासीनं, कतकिच्चमनासवं
उत्तमत्थमनुप्पत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो ध्यान करता है, निर्मल है, स्थिर है, जिसने अपना कार्य कर लिया है, जो विकाररहित है, जिसने उत्तम अर्थ को प्राप्त कर लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।
Sitting silent, dustless,
absorbed in jhana,
his task done, effluents gone,
ultimate goal attained:
he's what I call
a brahman.
३८७. दिवा तपति आदिच्चो, रत्तिमाभाति चन्दिमा
सन्नद्धो खत्तियो तपति, झायी तपति ब्राह्मणो.
अथ सब्बमहोरत्तिं, बुद्धो तपति तेजसा.
दिन में सूर्य तपता है, रात में चन्द्रमा, कवच पहन कर क्षत्रिय तपता है, ध्यान में ब्राह्मण, लेकिन बुद्ध दिन रात सबसे अधिक अपने तेज से चमकते हैं।
By day shines the sun;
by night, the moon;
in armor, the warrior;
in jhana, the brahman.
But all day & all night,
every day & every night,
the Awakened One shines
in splendor.
३८८. बाहितपापोति ब्राह्मणो, समचरियो समणोति वुच्चति
पब्बाजयमत्तनो मलं, तस्मा “पब्बजितो”ति वुच्चति.
जिसने अपने पापों को बहा दिया है, वह ब्राह्मण है, जिसकी चर्या सम है ( दिनचर्या, आचार-व्यवहार संतुलित है) , जिसने अपने चित्त के मलों दूर कर दिया है, उसे प्रवजित (संन्यासी) कहा जाता है।
He's called a brahman
for having banished his evil,
a contemplative
for living in consonance,
one gone forth
for having forsaken
his own impurities.
३८९. न ब्राह्मणस्स पहरेय्य, नास्स मुञ्चेथ ब्राह्मणो
धी ब्राह्मणस्स हन्तारं, ततो धी यस्स मुञ्चति.
कोई ब्राह्मण पर प्रहार न करे, ब्राह्मण भी प्रहारकर्ता पर क्रोध न करे। ब्राह्मण की हत्या करनेवाले को धिक्कार है, लेकिन जो ब्राह्मण क्रोध करता है, उसे अधिक धिक्कार है।
One should not strike a brahman,
nor should the brahman
let loose with his anger.
Shame on a brahman's killer.
More shame on the brahman
whose anger's let loose.
३९०. न ब्राह्मणस्सेतदकिञ्चि सेय्यो, यदा निसेधो मनसो पियेहि
यतो यतो हिंसमनो निवत्तति, ततो ततो सम्मतिमेव दुक्खं.
ब्राह्मण के लिए इससे अधिक श्रेयस्कर कोई बात नहीं है कि वह मन को प्रिय वस्तु से हटाये। ज्यों-ज्यों मन की हिंसा कमजोर पड़ती जाती है, त्यों-त्यों दुख की शान्ति होती है।
Nothing's better for the brahman
than when the mind is held back
from what is endearing & not.
However his harmful-heartedness
wears away,
that's how stress
simply comes to rest.
३९१. यस्स कायेन वाचाय, मनसा नत्थि दुक्कटं
संवुतं तीहि ठानेहि, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो काया, वाणी और मन से दुष्कर्म नहीं करता, जो तीनों से संयमित है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।
Whoever does no wrong
in body,
speech,
heart,
is restrained in these three ways:
he's what I call
a brahman.
३९२. यम्हा धम्मं विजानेय्य, सम्मासम्बुद्धदेसितं
सक्कच्चं तं नमस्सेय्य, अग्गिहुत्तंव ब्राह्मणो.
जिससे भी सम्यक् सम्बुद्ध बुद्ध द्वारा उपदिष्ट धर्म की शिक्षा मिले, उसे उसी प्रकार आदरपूर्वक नमन करना चाहिए, जैसे ब्राह्मण अग्निहोत्र के प्रति करते हैं।
The person from whom
you would learn the Dhamma
taught by the Rightly
Self-Awakened One:
you should honor him with respect —
as a brahman, the flame for a sacrifice.
३९३. न जटाहि न गोत्तेन, न जच्चा होति ब्राह्मणो
यम्हि सच्चञ्च धम्मो च, सो सुची सो च ब्राह्मणो.
न जटा से, न गोत्र से, न जन्म से कोई ब्राह्मण होता है। जिसके पास सत्य और धर्म है, वही पवित्र है, वही ब्राह्मण है।
Not by matted hair,
by clan, or by birth,
is one a brahman.
Whoever has truth
& rectitude:
he is a pure one,
he, a brahman.
३९४. किं ते जटाहि दुम्मेध, किं ते अजिनसाटिया
अब्भन्तरं ते गहनं, बाहिरं परिमज्जसि.
अरे मूर्ख, तुम्हारी जटा और तुम्हारे मृगचर्म के आसन से क्या फ़ायदा। तुम्हारे अभ्यंतर में गहन अन्धेरा है, बाहर परिमार्जन करने से क्या होगा?
What's the use of your matted hair,
you dullard?
What's the use of your deerskin cloak?
The tangle's inside you.
You comb the outside.
३९५. पंसुकूलधरं जन्तुं, किसं धमनिसन्थतं
एकं वनस्मिं झायन्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मण.
जो फटे-पुराने कपड़े पहनता है, जो कृशकाय है, जिसकी धमनियाँ भी दिखती हैं, जो वन में अकेला ध्यान करता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Wearing cast-off rags
— his body lean & lined with veins —
absorbed in jhana,
alone in the forest:
he's what I call
a brahman.
३९६. न चाहें ब्राह्मणं ब्रूमि, योनिजं मत्त्तिसम्भवं
भोवादि नाम सो होति, सचे होति सकिञ्चनो
अकिञ्चनं अनादानं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
मैं उसे ब्राह्मण नहीं कहता जो ब्राह्मण माता से उत्पन्न हुआ है, ‘भो’ कहता है और परिग्रही है। मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ, जो अकिंचन है, जो किसी से कुछ दान नहीं लेता।
I don't call one a brahman
for being born of a mother
or sprung from a womb.
He's called a 'bho-sayer'
if he has anything at all.
But someone with nothing,
who clings to no thing:
he's what I call
a brahman.
३९७. सब्बसंयोजनं छेत्वा, यो वे न परितस्सति
सङ्गातिगं विसंयुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो सभी संयोजनों (बन्धनों) को काटकर निर्भय रहता है, जो संग और आसक्ति से हट चुका है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Having cut every fetter,
he doesn't get ruffled.
Beyond attachment,
unshackled:
he's what I call
a brahman.
३९८. छेत्वा नद्धिं वरत्तञ्च, सन्दानं सहनुक्कमं
उक्खित्तपालिघं बुद्धं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो नत्थी, रस्सी, पगहा, और मुँह को बन्द करने वाली जाली को काटकर,अपना जुआ फेंककर, बुद्ध बना है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Having cut the strap & thong,
cord & bridle,
having thrown off the bar,
awakened:
he's what I call
a brahman.
३९९. अक्कोसं वधबन्धञ्च, अदुट्ठो यो तितिक्खति
खन्तीबलं बलानीकं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो गाली-गलौज, वध और कारावास को अपना चित्त दूषित किये बिना सह लेता है, जिसकी सेना का सेनापति क्षमाबल है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He endures — unangered —
insult, assault, & imprisonment.
His army is strength;
his strength, forbearance:
he's what I call
a brahman.
४००. अक्कोधनं वतवन्तं, सीलवन्तं अनुस्सदं
दन्तं अन्तिमसारीरं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसे क्रोध न आए, जो व्रती हो (अर्थात् जो संकल्प पूरा करे), शीलवान हो, तृष्णारहित हो, जो इन्द्रियों पर क़ाबू रखे, जिसका यह अन्तिम शरीर हो , उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
Free from anger,
duties observed,
principled, with no overbearing pride,
trained, a 'last-body':
he's what I call
a brahman.
४०१.वारि पोक्खरपत्तेव, आरग्गेरिव सासपो
यो न लिम्पति कामेसु, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
कमल के पत्ते पर जल की तरह, आरे की नोक पर सरसों के दाने की तरह जो कामसुख से अलिप्त रहता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Like water on a lotus leaf,
a mustard seed on the tip of an awl,
he doesn't adhere to sensual pleasures:
he's what I call
a brahman.
४०२. यो दुक्खस्स पजानाति, इधेव खयमत्तनो
पन्नाभारं विसंयुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो इसी जन्म में अपने दु:ख का क्षय कैसे हो जान लेता है, जिसने अपना भार उतार दिया है, जो अनासक्त है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
He discerns right here,
for himself,
on his own,
his own
ending of stress.
Unshackled, his burden laid down:
he's what I call
a brahman.
४०३. गम्भीरपञ्ञं मेधाविं, मग्गामग्गस्स कोविंद
उत्तमत्थमनुप्पत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसकी प्रज्ञा गम्भीर है, जो मेधावी है, जो मार्ग अमार्ग में अन्तर पहचानता है, जिसने उत्तम अर्थ प्राप्त कर लिया है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
Wise, profound
in discernment, astute
as to what is the path
& what's not;
his ultimate goal attained:
he's what I call
a brahman.
४०४. असंसट्ठं गहट्ठेहि, अनागारेहि चूभयं
अनोक सारिमप्पिच्छं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो गृहस्थ या गृहत्यागी दोनों से निकट संबंध नहीं रखता, जो अपना घर नहीं बनाता, जिसकी इच्छाएँ अत्यल्प हैं, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Uncontaminated
by householders
& houseless ones alike;
living with no home,
with next to no wants:
he's what I call
a brahman.
४०५. निधाय दण्डं भूतेसु, तसेसु थावरेसु च
यो न हन्ति न घातेति, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो चर-अचर सभी प्राणियों की हिंसा से विरत है, जो न मारता है न किसी को मारने के लिए प्रेरित करता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Having put aside violence
against beings fearful or firm,
he neither kills nor
gets others to kill:
he's what I call
a brahman.
४०६. अविरुद्धं विरुद्धेसु, अत्तदण्डेसु निब्बुतं
सादानेसु अनादानं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो विरोधियों के बीच अविरोधी है, शस्त्र धारण करने वालों के बीच निहत्था है, दान लेने वालों के बीच दान नहीं लेनेवाला है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Unopposing among opposition,
unbound among the armed,
unclinging among those who cling:
he's what I call
a brahman.
४०७. यस्स रागो च दोसो च, मानो मक्खो च पातितो
सासपोरिव आरग्गा, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसके राग, द्वेष, अभिमान, मत्सर (ईर्ष्या) उसी प्रकार गिर गए हैं, जैसे आरे की नोक से सरसों दाना, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
His passion, aversion,
conceit, & contempt,
have fallen away —
like a mustard seed
from the tip of an awl:
he's what I call
a brahman.
४०८. अकक्कसं विञ्ञापनिं, गिरं सच्चमुदीरये
याय नाभिसजे कञ्चि, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो कर्कश वाणी नहीं बोलता, बल्कि विषय को स्पष्ट करनेवाली और सच्ची वाणी बोलता है, जिससे किसी को दुख नहीं पहुँचता, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He would say
what's non-grating,
instructive,
true —
abusing no one:
he's what I call
a brahman.
४०९. योध दीघं व रस्सं वा, अणुं थूलं सुभासुभं
लोके अदिन्नं नादियति, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो इस लोक में बड़ी या छोटी, सूक्ष्म या स्थूल, अच्छी या बुरी वस्तु यदि वह दी न गयी हो, तो नहीं लेता है, तो मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Here in the world
he takes nothing not-given
— long, short,
large, small,
attractive, not:
he's what I call
a brahman.
४१०. आसा यस्स न विज्जन्ति, अस्मिं लोके परम्हि च
निरासासं विसंयुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसकी न इस लोक से और न परलोक से कोई अपेक्षा बची है, ऐसे आशारहित अनासक्त को मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
His longing for this
& for the next world
can't be found;
free from longing, unshackled:
he's what I call
a brahman.
४११. यस्सालया न विज्जन्ति, अञ्ञाय अक थंक थी
अमतोगधमनुप्पतं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसका कोई आलय (घर) नहीं है, जो अच्छी तरह जानकर अकथ(अवर्णनीय सत्य) बता सकता है, जिसने गाढ़ा अमृत पा लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
His attachments,
his homes,
can't be found.
Through knowing
he is unperplexed,
has come ashore
in the Deathless:
he's what I call
a brahman.
४१२. योध पुञ्ञञ्च पापञ्च, उभो सङ्गमुपच्चगा
असोकं विरजं सुद्धं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो पुण्य और पाप दोनों की आसक्ति से ऊपर उठ चुका है, जिसे कोई शोक नहीं है, जिसपर कोई धूल (दोष) नहीं है, जो शुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He has gone
beyond attachment here
for both merit & evil —
sorrowless, dustless, & pure:
he's what I call
a brahman.
४१३. चन्दंव विमलं सुद्धं, विप्पसन्नमनाविलं
नन्दीभवपरिक्खीणं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो चन्द्रमा की तरह विमल, शुद्ध और स्वच्छ है, जिसकी सभी जन्मों की तृष्णा क्षीण हो गयी है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Spotless, pure, like the moon
— limpid & calm —
his delights, his becomings,
totally gone:
he's what I call
a brahman.
४१४. योमं पलिपथं दुग्गं, संसारं मोहमच्चगा
तिण्णो पारगतो झायी, अनेजो अक थंक थी
अनुपादाय निब्बुतो, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसने इस दुर्गम संसार की ओर जाने वाले उल्टे मार्ग का मोह छोड़ दिया है, जो इस संसार सागर को पार कर गया है, जो ध्यान करनेवाला है, जिसमें कोई आसक्ति नहीं है, जिसने निर्वाण प्राप्त कर लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।
He has made his way past
this hard-going path
— samsara, delusion —
has crossed over,
has gone beyond,
is free from want,
from perplexity,
absorbed in jhana,
through no-clinging
Unbound:
he's what I call
a brahman.
४१५. योथ कामे पहन्त्वान, अनागारो परिब्बजे
कामभवपरिक्खीणं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो यहाँ कामोपभोग को छोड़कर, गृहत्याग कर संन्यासी बन गया है, जिसकी कामनाएँ और बार-बार जन्म लेने की लालसा पूरी तरह क्षीण हो गयी है,मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Whoever, abandoning sensual passions here,
would go forth from home —
his sensual passions, becomings,
totally gone:
he's what I call
a brahman.
४१६. योध तण्हं पहन्तवान, अनागारो परिब्बजे
तण्हाभवपरिक्खीणं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो यहाँ तृष्णाओं को छोड़कर, गृहत्याग कर संन्यासी बन गया है, जिसकी तृष्णाएँ और बार-बार जन्म लेने की लालसा पूरी तरह क्षीण हो गयी है,मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Whoever, abandoning craving here,
would go forth from home —
his cravings, becomings,
totally gone:
he's what I call
a brahman.
४१७. हित्वा मानुसकं योगं, दिब्बं योगं उपच्चगा
सब्बयोगविसंयुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राहमणं.
जो मानवोचित बन्धनों को छोड़ चुका है, जो देवोचित बन्धनों को भी त्याग चुका है, जो सभी बन्धनों से अलग हो चुका है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Having left behind
the human bond,
having made his way past
the divine,
from all bonds unshackled:
he's what I call
a brahman.
४१८. हित्वा रतिञ्च अरतिञ्च, सीतिभूतं निरुपधिं
सब्बलोकाभिभुं वीरं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो हर्ष और विषाद को छोड़कर शीतल हो चुका है, जिसे कोई क्लेश नहीं है, जिस वीर ने सारे लोक जीत लिए हैं, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
Having left behind
delight & displeasure,
cooled, with no acquisitions —
a hero who has conquered
all the world,
every world:
he's what I call
a brahman.
४१९. चुतिं यो वेदि सत्तानं, उपपत्तिञ्च सब्बसो
असत्तं सुगतं बुद्धं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो प्राणियों की च्युति (इस लोक से प्रस्थान) और उसकी पुनः उत्पत्ति को देख सकता है, जो सबसे अनासक्त है, जिसे अच्छी गति मिली है, जो बुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He knows in every way
beings' passing away,
and their re-
arising;
unattached, awakened,
well-gone:
he's what I call
a brahman.
.
४२०. यस्स गतिं न जानन्ति, देवा गन्धब्बमानुसा
खीणासवं अरहन्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसकी गति देवता, गन्धर्व और मनुष्य नहीं जानते हैं, जिनके विकार नष्ट हो गये हैं, जो अर्हन्त है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He whose course they don't know
— devas, gandhabbas, & human beings —
his effluents ended, an arahant:
he's what I call
a brahman.
४२१. यस्स पुरे च पच्छा च, मज्झे च नत्थि किञ्चनं
अकिञ्चनं अनादानं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जिसके आगे, पीछे और मध्य में कुछ भी नहीं है, जो अकिंचन है, जो दान नहीं लेता, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He who has nothing
— in front, behind, in between —
the one with nothing
who clings to no thing:
he's what I call
a brahman.
४२२. उसभं पवरं वीरं, महेसिं विजिताविनं
अनेजं न्हातकं बुद्धं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो श्रेष्ठ, प्रवर, वीर, महर्षि, विजेता, अकम्प्य, स्नातक और बुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
A splendid bull, conqueror,
hero, great seer —
free from want,
awakened, washed:
he's what I call
a brahman.
४२३. पुब्बेनिवासं यो वेदि, सग्गापायञ्च पस्सति,
अथो जातिक्खयं पत्तो, अभिञ्ञावोसितो मुनि
सब्बवोसितवोसानं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.
जो अपने पूर्व जन्म जानता है, जो स्वर्ग नरक देखता है, जिसका भावी जन्म क्षीण हो गया है, जो पूरी तरह ज्ञान में अवस्थित है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।
He knows his former lives.
He sees heavens & states of woe,
has attained the ending of birth,
is a sage who has mastered full-knowing,
his mastery
totally mastered:
he's what I call
a brahman.
Brahmanavagga: Brahmans" (Dhp XXVI), translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight (BCBS Edition), 30 November 2013, http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.26.than.html .
हिन्दी अनुवाद: राजीव
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