Tuesday, February 16, 2021

२६. ब्राह्मणवग्गो


३८३. छिंद सोतं परक्कम्मकामे पनुद ब्राह्मण
सङ्खारानं खयं ञत्वाअकतञ्ञूसि ब्राह्मण.

 

हे ब्राह्मण, तृष्णा के स्रोत का छेदन कर, पराक्रम कर, कामनाओं को भगाओ, संस्कारों का क्षय कैसे होता है, जानकर अकृत (निर्वाण) जाननेवाला बनो।

 

Having striven, brahman,

         cut the stream.

         Expel sensual passions.

Knowing the ending of fabrications,

            brahman,

         you know the Unmade.

 

 

३८४. यदा द्वयेसु धम्मेसु, पारगू होति ब्राह्मणो
अथस्स सब्बे संयोगो, अत्थं गच्छन्ति जानतो.

 

जब ब्राह्मण दो धर्मों( चित्त संयम और भावना) में पारंगत हो जाता है, तो उस ज्ञानी  के सारे संयोग (बन्धन ) नष्ट हो जाते हैं।

 

When the brahman has gone

to the beyond of two things,

then all his fetters

go to their end —

         he who knows.

 

३८५. यस्स पारं अपारं वापारापारं न विज्जति
वीतद्दरं विसंयुत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसका पार, अपार या पारापार नहीं है, जो निर्भय है और अनासक्त है मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।

 

One whose beyond or

not-beyond or

beyond-&-not-beyond

can't be found;

unshackled, carefree:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३८६. झायिं विरजमासीनंकतकिच्चमनासवं
उत्तमत्थमनुप्पत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो ध्यान करता है, निर्मल है, स्थिर है, जिसने अपना कार्य कर लिया है, जो विकाररहित है, जिसने उत्तम अर्थ को प्राप्त कर लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।

 

Sitting silent, dustless,

absorbed in jhana,

his task done, effluents gone,

ultimate goal attained:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३८७. दिवा तपति आदिच्चोरत्तिमाभाति चन्दिमा
सन्नद्धो खत्तियो तपतिझायी तपति ब्राह्मणो.
अथ सब्बमहोरत्तिंबुद्धो तपति तेजसा.

 

दिन में सूर्य तपता है, रात में चन्द्रमा, कवच पहन कर क्षत्रिय तपता है, ध्यान में ब्राह्मण, लेकिन बुद्ध दिन रात सबसे अधिक अपने तेज से चमकते हैं।

 

By day shines the sun;

by night, the moon;

in armor, the warrior;

in jhana, the brahman.

But all day & all night,

every day & every night,

the Awakened One shines

         in splendor.

 

३८८. बाहितपापोति ब्राह्मणोसमचरियो समणोति वुच्चति
पब्बाजयमत्तनो मलंतस्मा “पब्बजितो”ति वुच्चति.

 

जिसने अपने पापों को बहा दिया है, वह ब्राह्मण है, जिसकी चर्या सम है ( दिनचर्या, आचार-व्यवहार संतुलित है) , जिसने अपने चित्त के मलों दूर कर दिया है, उसे प्रवजित (संन्यासी) कहा जाता है।

 

He's called a brahman

         for having banished his evil,

a contemplative

         for living in consonance,

one gone forth

         for having forsaken

         his own impurities.

 

 

३८९. न ब्राह्मणस्स पहरेय्यनास्स मुञ्चेथ ब्राह्मणो
धी ब्राह्मणस्स हन्तारंततो धी यस्स मुञ्चति.

 

कोई ब्राह्मण पर प्रहार न करे, ब्राह्मण भी प्रहारकर्ता पर क्रोध न करे। ब्राह्मण की हत्या करनेवाले को धिक्कार है, लेकिन जो ब्राह्मण क्रोध करता है, उसे अधिक धिक्कार है।

 

One should not strike a brahman,

nor should the brahman

let loose with his anger.

Shame on a brahman's killer.

More shame on the brahman

         whose anger's let loose.

 

३९०. न ब्राह्मणस्सेतदकिञ्चि सेय्योयदा निसेधो मनसो पियेहि
यतो यतो हिंसमनो निवत्ततिततो ततो सम्मतिमेव दुक्खं.


ब्राह्मण के लिए इससे अधिक श्रेयस्कर कोई बात नहीं है कि वह मन को प्रिय वस्तु से हटाये। ज्यों-ज्यों मन की हिंसा कमजोर पड़ती जाती है, त्यों-त्यों दुख की शान्ति होती है।

 

Nothing's better for the brahman

than when the mind is held back

from what is endearing & not.

However his harmful-heartedness

         wears away,

that's how stress

simply comes to rest.

 

३९१. यस्स कायेन वाचायमनसा नत्थि दुक्कटं
संवुतं तीहि ठानेहितमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो काया, वाणी और मन से दुष्कर्म नहीं करता, जो तीनों से संयमित है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।

 

Whoever does no wrong

         in body,

         speech,

         heart,

is restrained in these three ways:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३९२. यम्हा धम्मं विजानेय्यसम्मासम्बुद्धदेसितं
सक्कच्चं तं नमस्सेय्यअग्गिहुत्तंव ब्राह्मणो.

 

जिससे भी सम्यक् सम्बुद्ध बुद्ध द्वारा उपदिष्ट धर्म की शिक्षा मिले, उसे उसी प्रकार आदरपूर्वक नमन करना चाहिए, जैसे ब्राह्मण अग्निहोत्र के प्रति करते हैं।


The person from whom

you would learn the Dhamma

taught by the Rightly

Self-Awakened One:

you should honor him with respect —

as a brahman, the flame for a sacrifice.

 

३९३. न जटाहि न गोत्तेनन जच्चा होति ब्राह्मणो
यम्हि सच्चञ्च धम्मो चसो सुची सो च ब्राह्मणो.

 

न जटा से, न गोत्र से, न जन्म से कोई ब्राह्मण होता है। जिसके पास सत्य और धर्म है, वही पवित्र है, वही ब्राह्मण है।

 

Not by matted hair,

by clan, or by birth,

is one a brahman.

Whoever has truth

& rectitude:

         he is a pure one,

         he, a brahman.

 

३९४. किं ते जटाहि दुम्मेधकिं ते अजिनसाटिया
अब्भन्तरं ते गहनंबाहिरं परिमज्जसि.

 

अरे मूर्ख, तुम्हारी जटा और तुम्हारे मृगचर्म के आसन से क्या फ़ायदा। तुम्हारे अभ्यंतर में गहन अन्धेरा है, बाहर परिमार्जन करने से क्या होगा?

 

What's the use of your matted hair,

         you dullard?

What's the use of your deerskin cloak?

The tangle's inside you.

You comb the outside.

 

 

३९५. पंसुकूलधरं जन्तुंकिसं धमनिसन्थतं
एकं वनस्मिं झायन्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मण.

 

जो फटे-पुराने कपड़े पहनता है, जो कृशकाय है, जिसकी धमनियाँ भी दिखती हैं, जो वन में अकेला ध्यान करता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Wearing cast-off rags

 — his body lean & lined with veins —

absorbed in jhana,

alone in the forest:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३९६. न चाहें ब्राह्मणं ब्रूमियोनिजं मत्त्तिसम्भवं
भोवादि नाम सो होतिसचे होति सकिञ्चनो
अकिञ्चनं अनादानंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

मैं उसे ब्राह्मण नहीं कहता जो ब्राह्मण माता से उत्पन्न हुआ है, ‘भो’ कहता है  और परिग्रही है। मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ, जो अकिंचन है, जो किसी से कुछ दान नहीं लेता।

 

I don't call one a brahman

for being born of a mother

or sprung from a womb.

He's called a 'bho-sayer'

if he has anything at all.

But someone with nothing,

who clings to no thing:

         he's what I call

         a brahman.

 

३९७. सब्बसंयोजनं छेत्वायो वे न परितस्सति
सङ्गातिगं विसंयुत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं. 

 

जो सभी संयोजनों (बन्धनों) को काटकर निर्भय रहता है, जो संग और आसक्ति से हट चुका है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Having cut every fetter,

he doesn't get ruffled.

Beyond attachment,

unshackled:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३९८. छेत्वा नद्धिं वरत्तञ्चसन्दानं सहनुक्कमं
उक्खित्तपालिघं बुद्धंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो  नत्थी, रस्सी, पगहा, और मुँह को बन्द करने वाली जाली को काटकर,अपना जुआ फेंककर, बुद्ध बना है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Having cut the strap & thong,

         cord & bridle,

having thrown off the bar,

         awakened:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

३९९. अक्कोसं वधबन्धञ्चअदुट्ठो यो तितिक्खति
खन्तीबलं बलानीकंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो गाली-गलौज, वध और कारावास को अपना चित्त दूषित किये बिना सह लेता है, जिसकी सेना का सेनापति क्षमाबल है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

He endures — unangered —

insult, assault, & imprisonment.

His army is strength;

his strength, forbearance:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

४००. अक्कोधनं वतवन्तंसीलवन्तं अनुस्सदं
दन्तं अन्तिमसारीरंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसे क्रोध न आए, जो व्रती हो (अर्थात् जो संकल्प पूरा करे), शीलवान हो, तृष्णारहित हो, जो इन्द्रियों पर क़ाबू रखे, जिसका यह अन्तिम शरीर हो , उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Free from anger,

duties observed,

principled, with no overbearing pride,

trained, a 'last-body':

         he's what I call

         a brahman.

 

४०१.वारि पोक्खरपत्तेवआरग्गेरिव सासपो
यो न लिम्पति कामेसुतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

कमल के पत्ते पर जल की तरह, आरे की नोक पर सरसों के दाने की तरह जो कामसुख से अलिप्त रहता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Like water     on a lotus leaf,

a mustard seed  on the tip of an awl,

he doesn't adhere to sensual pleasures:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

४०२. यो दुक्खस्स पजानातिइधेव खयमत्तनो
पन्नाभारं विसंयुत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो इसी जन्म में अपने दु:ख का क्षय कैसे हो जान लेता है, जिसने अपना भार उतार दिया है, जो अनासक्त है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

He discerns right here,

         for himself,

         on his own,

         his own

         ending of stress.

Unshackled, his burden laid down:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०३. गम्भीरपञ्ञं मेधाविंमग्गामग्गस्स कोविंद
उत्तमत्थमनुप्पत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसकी प्रज्ञा गम्भीर है, जो मेधावी है, जो मार्ग अमार्ग में अन्तर पहचानता है, जिसने उत्तम अर्थ प्राप्त कर लिया है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Wise, profound

in discernment, astute

as to what is the path

& what's not;

his ultimate goal attained:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०४. असंसट्ठं गहट्ठेहिअनागारेहि चूभयं
अनोक सारिमप्पिच्छंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो गृहस्थ या गृहत्यागी दोनों से निकट संबंध नहीं रखता, जो अपना घर नहीं बनाता, जिसकी इच्छाएँ अत्यल्प हैं,  मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Uncontaminated

by householders

& houseless ones alike;

living with no home,

with next to no wants:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०५. निधाय दण्डं भूतेसुतसेसु थावरेसु च
यो न हन्ति न घातेतितमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो चर-अचर सभी प्राणियों की हिंसा से विरत है, जो न मारता है न किसी को मारने के लिए प्रेरित करता है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Having put aside violence

against beings fearful or firm,

he neither kills nor

gets others to kill:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०६. अविरुद्धं विरुद्धेसुअत्तदण्डेसु निब्बुतं
सादानेसु अनादानंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो विरोधियों के बीच अविरोधी है, शस्त्र धारण करने वालों के बीच निहत्था है, दान लेने वालों के बीच दान नहीं लेनेवाला है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Unopposing among opposition,

unbound     among the armed,

unclinging  among those who cling:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०७. यस्स रागो च दोसो चमानो मक्खो च पातितो
सासपोरिव आरग्गातमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसके राग, द्वेष, अभिमान, मत्सर (ईर्ष्या) उसी प्रकार गिर गए हैं, जैसे आरे की नोक से सरसों दाना, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

His passion, aversion,

conceit, & contempt,

have fallen away —

like a mustard seed

from the tip of an awl:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०८. अकक्कसं विञ्ञापनिंगिरं सच्चमुदीरये
याय नाभिसजे कञ्चितमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो कर्कश वाणी नहीं बोलता, बल्कि विषय को स्पष्ट करनेवाली और सच्ची वाणी बोलता है, जिससे किसी को दुख नहीं पहुँचता, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।



He would say

what's  non-grating,

                instructive,

                true —

abusing no one:

         he's what I call

         a brahman.

 

४०९. योध दीघं व रस्सं वाअणुं थूलं सुभासुभं
लोके अदिन्नं नादियतितमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो इस लोक में बड़ी या छोटी, सूक्ष्म या स्थूल, अच्छी या बुरी वस्तु यदि वह दी न गयी हो, तो नहीं लेता है, तो मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Here in the world

he takes nothing not-given

 — long, short,

         large, small,

            attractive, not:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१०. आसा यस्स न विज्जन्तिअस्मिं लोके परम्हि च
निरासासं विसंयुत्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसकी न इस लोक से और न परलोक से कोई अपेक्षा बची है, ऐसे आशारहित अनासक्त को मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

His longing for this

& for the next world

can't be found;

free from longing, unshackled:

         he's what I call

         a brahman.

 

४११. यस्सालया न विज्जन्तिअञ्ञाय अक थंक थी
अमतोगधमनुप्पतंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसका कोई आलय (घर) नहीं है, जो अच्छी तरह जानकर अकथ(अवर्णनीय सत्य) बता सकता है, जिसने गाढ़ा अमृत पा लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

 

His attachments,

         his homes,

            can't be found.

Through knowing

he is unperplexed,

has come ashore

in the Deathless:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१२. योध पुञ्ञञ्च पापञ्चउभो सङ्गमुपच्चगा
असोकं विरजं सुद्धंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो पुण्य और पाप दोनों की आसक्ति से ऊपर उठ चुका है, जिसे कोई शोक नहीं है, जिसपर कोई धूल (दोष) नहीं है, जो शुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।



He has gone

beyond attachment here

for both merit & evil —

sorrowless, dustless, & pure:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

४१३. चन्दंव विमलं सुद्धंविप्पसन्नमनाविलं
नन्दीभवपरिक्खीणंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो चन्द्रमा की तरह विमल, शुद्ध और स्वच्छ है, जिसकी सभी जन्मों की तृष्णा क्षीण हो गयी है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Spotless, pure, like the moon

         — limpid & calm —

his delights, his becomings,

            totally gone:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

४१४. योमं पलिपथं दुग्गंसंसारं मोहमच्चगा
तिण्णो पारगतो झायीअनेजो अक थंक थी
अनुपादाय निब्बुतोतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 


जिसने इस दुर्गम संसार की ओर जाने वाले उल्टे मार्ग का मोह छोड़ दिया है, जो इस संसार सागर को पार कर गया है, जो ध्यान करनेवाला है, जिसमें कोई आसक्ति नहीं है, जिसने निर्वाण प्राप्त कर लिया है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ।

 

He has made his way past

this hard-going path

 — samsara, delusion —

has crossed over,

has gone beyond,

is free from want,

         from perplexity,

absorbed in jhana,

through no-clinging

Unbound:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१५. योथ कामे पहन्त्वानअनागारो परिब्बजे
कामभवपरिक्खीणंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो यहाँ कामोपभोग को छोड़कर, गृहत्याग कर संन्यासी बन गया है, जिसकी कामनाएँ और बार-बार जन्म लेने की लालसा पूरी तरह क्षीण हो गयी है,मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Whoever, abandoning sensual passions here,

would go forth from home —

his sensual passions, becomings,

            totally gone:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१६. योध तण्हं पहन्तवानअनागारो परिब्बजे
तण्हाभवपरिक्खीणंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.


जो यहाँ तृष्णाओं को छोड़कर, गृहत्याग कर संन्यासी बन गया है, जिसकी तृष्णाएँ और बार-बार जन्म लेने की लालसा पूरी तरह क्षीण हो गयी है,मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

 

Whoever, abandoning craving here,

would go forth from home —

his cravings, becomings,

            totally gone:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१७. हित्वा मानुसकं योगंदिब्बं योगं उपच्चगा
सब्बयोगविसंयुत्तंतमहं ब्रूमि ब्राहमणं.

 

जो मानवोचित बन्धनों को छोड़ चुका है, जो देवोचित बन्धनों को भी त्याग चुका है, जो सभी बन्धनों से अलग हो चुका है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Having left behind

         the human bond,

having made his way past

         the divine,

from all bonds unshackled:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१८. हित्वा रतिञ्च अरतिञ्चसीतिभूतं निरुपधिं
सब्बलोकाभिभुं वीरंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो हर्ष और विषाद को छोड़कर शीतल हो चुका है, जिसे कोई क्लेश नहीं है, जिस वीर ने सारे लोक जीत लिए हैं, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

Having left behind

delight & displeasure,

cooled, with no acquisitions —

a hero who has conquered

            all the world,

            every world:

         he's what I call

         a brahman.

 

४१९. चुतिं यो वेदि सत्तानंउपपत्तिञ्च सब्बसो
असत्तं सुगतं बुद्धंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो प्राणियों की च्युति (इस लोक से प्रस्थान) और उसकी पुनः उत्पत्ति को देख सकता है, जो सबसे अनासक्त है, जिसे अच्छी गति मिली है, जो बुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।



He knows in every way

beings' passing away,

and their re-

arising;

unattached, awakened,

well-gone:

         he's what I call

         a brahman.

 

 

.

४२०. यस्स गतिं न जानन्तिदेवा गन्धब्बमानुसा
खीणासवं अरहन्तंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसकी गति देवता, गन्धर्व और मनुष्य नहीं जानते हैं, जिनके विकार नष्ट हो गये हैं, जो अर्हन्त है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

He whose course they don't know

 — devas, gandhabbas, & human beings —

his effluents ended, an arahant:

         he's what I call

         a brahman.

 

४२१. यस्स पुरे च पच्छा चमज्झे च नत्थि किञ्चनं
अकिञ्चनं अनादानंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जिसके आगे, पीछे और मध्य में कुछ भी नहीं है, जो अकिंचन है, जो दान नहीं लेता, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

He who has nothing

 — in front, behind, in between —

the one with nothing

who clings to no thing:

         he's what I call

         a brahman.

 

४२२. उसभं पवरं वीरंमहेसिं विजिताविनं
अनेजं न्हातकं बुद्धंतमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो श्रेष्ठ, प्रवर, वीर, महर्षि, विजेता, अकम्प्य, स्नातक और बुद्ध है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

A splendid bull, conqueror,

hero, great seer —

            free from want,

            awakened, washed:

         he's what I call

         a brahman.

 

४२३. पुब्बेनिवासं यो वेदि, सग्गापायञ्च पस्सति,
अथो जातिक्खयं पत्तो, अभिञ्ञावोसितो मुनि
सब्बवोसितवोसानं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं.

 

जो अपने पूर्व जन्म जानता है, जो स्वर्ग नरक देखता है, जिसका भावी जन्म क्षीण हो गया है, जो पूरी तरह ज्ञान में  अवस्थित है, मैं उसे ब्राह्मण कहता हूँ ।

 

He knows    his former lives.

He sees         heavens & states of woe,

has attained    the ending of birth,

is a sage   who has mastered full-knowing,

                    his mastery

totally mastered:

         he's what I call

         a brahman.

 

Brahmanavagga: Brahmans" (Dhp XXVI), translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight (BCBS Edition), 30 November 2013, http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.26.than.html .

 

 

हिन्दी अनुवाद: राजीव