Monday, April 1, 2013

पापवग्गो



११६.


अभित्थरेथ कल्याणे, पापा चित्तं निवारये।
दन्धञ्हि करोतो पुञ्‍ञं, पापस्मिं रमती मनो॥

कल्याण करने में शीघ्रता करनी चाहिए, चित्त को पाप से बचाना चाहिए। यदि पुण्य करने में अन्तर्द्वन्द्व हो तो पाप में मन रमने लगता है।

Be quick in doing what's admirable. Restrain your mind from what's evil. When you're slow in making merit, evil delights the mind.

११७.


पापञ्‍चे पुरिसो कयिरा, न नं [न तं (सी॰ पी॰)] कयिरा पुनप्पुनं।
न तम्हि छन्दं कयिराथ, दुक्खो पापस्स उच्‍चयो॥

मनुष्य से यदि पाप हो जाए तो उसे बार-बार न दोहराए, उसके प्रति तीव्र लालसा पैदा न करे। पाप के संचय से दुख होता है।

If a person does evil, he shouldn't do it again & again, shouldn't develop a penchant for it. To accumulate evil brings pain.

११८.


पुञ्‍ञञ्‍चे पुरिसो कयिरा, कयिरा नं [कयिराथेतं (सी॰ स्या॰), कयिराथेनं (पी॰)] पुनप्पुनं।
तम्हि छन्दं कयिराथ, सुखो पुञ्‍ञस्स उच्‍चयो॥

मनुष्य  यदि पुण्य कर्म करे तो  उसे बार-बार दोहराए, उसके प्रति तीव्र लालसा पैदा करे।पुण्य के संचय से सुख होता है।

If a person makes merit, he should do it again & again, should develop a penchant for it. To accumulate merit brings ease.

११९
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पापोपि पस्सति भद्रं, याव पापं न पच्‍चति।
यदा च पच्‍चति पापं, अथ पापो पापानि [अथ पापानि (?)] पस्सति॥

जब तक पाप परिपक्व नहीं होता तब तक पापी को भी शुभ का दर्शन हो सकता है। जब पाप परिपक्व हो जाता है तब पापी को पाप (अशुभ) दिखता है।

Even the evil meet with good fortune as long as their evil has yet to mature. But when it's matured that's when they meet with evil.

१२०.


भद्रोपि पस्सति पापं, याव भद्रं न पच्‍चति।
यदा च पच्‍चति भद्रं, अथ भद्रो भद्रानि [अथ भद्रानि (?)] पस्सति॥

जब तक शुभ परिपक्व नहीं होता तब तक पुण्यात्मा को भी अशुभ का दर्शन हो सकता है। जब शुभ परिपक्व हो जाता है तब पुण्यात्मा को शुभ दिखता है।


Even the good meet with bad fortune as long as their good has yet to mature. But when it's matured that's when they meet with good fortune.

१२१.



मावमञ्‍ञेथ [माप्पमञ्‍ञेथ (सी॰ स्या॰ पी॰)] पापस्स, न मन्तं [न मं तं (सी॰ पी॰), न मत्तं (स्या॰)] आगमिस्सति।
उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरति।
बालो पूरति [पूरति बालो (सी॰ क॰), आपूरति बालो (स्या॰)] पापस्स, थोकं थोकम्पि [थोक थोकम्पि (सी॰ पी॰)] आचिनं॥

पाप को कम करके नहीं आँकना चाहिए, कि वह मुझ तक नहीं पहुंचेगा। जैसे बूँद-बूँद टपकते पानी से से घड़ा भर जाता है, वैसे ही मूर्ख धीरे-धीरे आदतन संचित पापकर्मों से अपने  आप को भर लेता है।

Don't underestimate evil ('It won't amount to much'). A water jar fills, even with water falling in drops. With evil — even if bit by bit, habitually — the fool fills himself full.

१२२
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मावमञ्‍ञेथ पुञ्‍ञस्स, न मन्तं आगमिस्सति।
उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरति।
धीरो पूरति पुञ्‍ञस्स, थोकं थोकम्पि आचिनं॥

पुण्य को कम करके नहीं आँकना चाहिए, कि वह मुझ तक नहीं पहुंचेगा। जैसे बूँद-बूँद टपकते पानी से से घड़ा भर जाता है, वैसे ही धीर व्यक्ति धीरे-धीरे आदतन् संचित पुण्यकर्मों से अपने  आप को भर लेता है।

Don't underestimate merit ('It won't amount to much'). A water jar fills, even with water falling in drops. With merit — even if bit by bit, habitually — the enlightened one fills himself full.
१२३.



वाणिजोव भयं मग्गं, अप्पसत्थो महद्धनो।
विसं जीवितुकामोव, पापानि परिवज्‍जये॥

जैसे कोई व्यापारी, जिसके सहयात्री कम हैं लेकिन जिसके पास धन अधिक है, किसी भयावह मार्ग से जाने से डरता है अथवा जैसे जीवन की कामना रखने वाला जहर से डरता है , वेसे ही पाप से बचना चाहिए।

Like a merchant with a small but well-laden caravan — a dangerous road, like a person who loves life — a poison, one should avoid — evil deeds.

१२४.


पाणिम्हि चे वणो नास्स, हरेय्य पाणिना विसं।
नाब्बणं विसमन्वेति, नत्थि पापं अकुब्बतो॥

यदि हथेली में जख्म न हो तो हम उस पर जहर भी रख सकते हैं। जख्म न हो तो जहर प्रवेश नहीं करता। जो पाप नहीं करते उनके लिए अशुभ नहीं है।

If there's no wound on the hand, that hand can hold poison. Poison won't penetrate where there's no wound. There's no evil for those who don't do it.


१२५.


यो अप्पदुट्ठस्स नरस्स दुस्सति, सुद्धस्स पोसस्स अनङ्गणस्स।
तमेव बालं पच्‍चेति पापं, सुखुमो रजो पटिवातंव खित्तो॥

यदि कोई अप्रदुष्ट , पवित्र और  दोषरहित व्यक्ति को दोष देता है, तो हवा के विरुद्ध फेंकी गयी धूल के समान उस मूर्ख को ही पाप/दोष लगता है।

Whoever harasses an innocent man, a man pure, without blemish: the evil comes right back to the fool like fine dust thrown against the wind.

१२६.


गब्भमेके उप्पज्‍जन्ति, निरयं पापकम्मिनो।
सग्गं सुगतिनो यन्ति, परिनिब्बन्ति अनासवा॥

पापकर्मियों में कोई गर्भ में जन्म लेता है, कोई नर्क में । जो अच्छे मार्ग काअनुसरण करते हैं, वे स्वर्ग जाते हैं। जो विकाररहित हैं वे निर्वाण प्राप्त करते हैं।

Some are born in the human womb, evildoers in hell, those on the good course go to heaven, while those without effluent: totally unbound.
१२७.


न अन्तलिक्खे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स [पविसं (स्या॰)]
न विज्‍जती [न विज्‍जति (क॰ सी॰ पी॰ क॰)] सो जगतिप्पदेसो, यत्थट्ठितो [यत्रट्ठितो (स्या॰)] मुच्‍चेय्य पापकम्मा॥

न अन्तरिक्ष में, न समुद्र की गहराइयों में, न पर्वत की गुफाओं में प्रवेश करके - इस दुनिया में कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां रहकर  आप अपने पापकर्म ( के प्रभाव) से बच सकते हैं।

Not up in the air, nor in the middle of the sea, nor going into a cleft in the mountains — nowhere on earth — is a spot to be found where you could stay & escape your evil deed.

१२८.



न यअन्तलिक्खे न समुद्दमज्झे, न पब्बतानं विवरं पविस्स।
न विज्‍जती सो जगतिप्पदेसो, यत्थट्ठितं [यत्रट्ठितं (स्या॰)] नप्पसहेय्य मच्‍चु॥



न अन्तरिक्ष में, न समुद्र की गहराइयों में, न पर्वत की गुफाओं में प्रवेश करके - इस दुनिया में कोई भी ऐसा स्थान नहीं  है जहां रहकर  आप मृत्यु से बच सकते हैं।

Not up in the air, nor in the middle of the sea, nor going into a cleft in the mountains — nowhere on earth — is a spot to be found where you could stay & not succumb to death.

translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight, 29 April 2012,http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.09.than.html . Retrieved on 20 March 2013.


हिन्दी अनुवाद: राजीव

Wednesday, March 20, 2013

सहस्सवग्गो



१००.
सहस्समपि चे वाचा, अनत्थपदसंहिता।
एकं अत्थपदं सेय्यो, यं सुत्वा उपसम्मति॥

हजारों निरर्थक शब्दों से भरे हुए वचन की तुलना में वह एक सार्थक शब्द श्रेष्ठ है, जिसे सुनकर मनुष्य को शांति मिलती है।

Better than if there were thousands of meaningless words is one meaningful word that on hearing brings peace.


१०१.
सहस्समपि चे गाथा, अनत्थपदसंहिता।
एकं गाथापदं सेय्यो, यं सुत्वा उपसम्मति॥

हजारों निरर्थक पदों से बनी हुई गाथा की तुलना में गाथा का एक पद भी श्रेष्ठ है यदि उसे सुनकर शान्ति मिलती है

Better than if there were thousands of meaningless verses is one meaningful verse that on hearing brings peace.
१०२.
यो च गाथा सतं भासे, अनत्थपदसंहिता [अनत्थपदसञ्हितं (क॰) विसेसनं हेतं गाथातिपदस्स]
एकं धम्मपदं सेय्यो, यं सुत्वा उपसम्मति॥

निरर्थक पदों से बनी सैकड़ों गाथाओं का वाचन करने से श्रेयस्कर है एक धम्मपद का वाचन करना जिसे सुनकर  शांति मिलती है।


And better than chanting hundreds of meaningless verses is one Dhamma-saying that on hearing brings peace.
१०३.
यो सहस्सं सहस्सेन, सङ्गामे मानुसे जिने।
एकञ्‍च जेय्यमत्तानं [अत्तानं (सी॰ पी॰)], स वे सङ्गामजुत्तमो॥

जो संग्राम में हजारों-हजार मनुष्यों पर विजय पाते हैं, उनसे श्रेष्ठ योद्धा है वह मनुष्य  जिसने केवल एक -अपने आप पर विजय पायी है।

Greater in battle than the man who would conquer a thousand-thousand men, is he who would conquer just one — himself.

१०४.
अत्ता हवे जितं सेय्यो, या चायं इतरा पजा।
अत्तदन्तस्स पोसस्स, निच्‍चं सञ्‍ञतचारिनो॥

१०५.
नेव देवो न गन्धब्बो, न मारो सह ब्रह्मुना।
जितं अपजितं कयिरा, तथारूपस्स जन्तुनो॥

दूसरों की अपेक्षा अपने आप पर विजय पाना श्रेयस्कर है। अपने को अंकुश में रखनेवाले, सदा संयमित जीवन जीने वाले पुरुष की जीत को न तो देवता, न गन्धर्व, न मार, न ब्रह्मा पराजय में बदल सकता है।
Better to conquer yourself than others. When you've trained yourself, living in constant self-control, neither a deva nor gandhabba, nor a Mara banded with Brahmas, could turn that triumph back into defeat.
१०६.
मासे मासे सहस्सेन, यो यजेथ सतं समं।
एकञ्‍च भावितत्तानं, मुहुत्तमपि पूजये।
सायेव पूजना सेय्यो, यञ्‍चे वस्ससतं हुतं॥

महीनों हजारों खर्च कर जो सेकड़ों यज्ञ करता है, वह यदि एक भावितात्मा ( जिसने भावना /चिन्तन द्वारा आत्म विकास किया है) की एक मुहूर्त भर भी पूजा करता है, तो वह पूजा सौ वर्षों की आहुति से श्रेष्ठ है।  

You could, month by month, at a cost of thousands, conduct sacrifices a hundred times, or pay a single moment's homage to one person, self-cultivated.
Better than a hundred years of sacrifices would that act of homage be.
१०७.
यो च वस्ससतं जन्तु, अग्गिं परिचरे वने।
एकञ्‍च भावितत्तानं, मुहुत्तमपि पूजये।
सायेव पूजना सेय्यो, यञ्‍चे वस्ससतं हुतं॥


सैकड़ों वर्ष वन में रहकर अग्नि की परिचर्या करने के बजाय यदि कोई भावितात्मा ( जिसने भावना /चिन्तन द्वारा आत्म विकास किया है) की एक मुहूर्त भर भी पूजा करता है, तो वह पूजा सौ वर्षों की आहुति से श्रेष्ठ है।  


You could, for a hundred years, live in a forest tending a fire, or pay a single moment's homage to one person, self-cultivated. Better than a hundred years of sacrifices would that act of homage be.

१०८.
यं किञ्‍चि यिट्ठं व हुतं व [यिट्ठञ्‍च हुतञ्‍च (क॰)] लोके, संवच्छरं यजेथ पुञ्‍ञपेक्खो।
सब्बम्पि तं न चतुभागमेति, अभिवादना उज्‍जुगतेसु सेय्यो॥

इस संसार में  पुण्य की अभिलाषा में पूरे साल चाहे कितना भी दान या आहूति दी जाए, उससे मिलने वाला पुण्य सीधी राह जाने वाले (ऋजुगत) महापुरुषों का अभिवादन करने से मिलनेवाले पुण्य का  चतुर्थांश भी नहीं होगा।

Everything offered or sacrificed in the world for an entire year by one seeking merit doesn't come to a fourth. Better to pay respect to those who've gone the straight way.
१०९.
अभिवादनसीलिस्स, निच्‍चं वुड्ढापचायिनो [वद्धापचायिनो (सी॰ पी॰)]
चत्तारो धम्मा वड्ढन्ति, आयु वण्णो सुखं बलं॥

जो अभिवादनशील हैं, जो नित्य बुजुर्गों को आदर देते हैं, उनकी चार चीजें बढ़ती हैं-  आयु, वर्ण,सुख और बल

if you're respectful by habit, constantly honoring the worthy, four things increase: long life, beauty, happiness, strength.
११०.
यो च वस्ससतं जीवे, दुस्सीलो असमाहितो।
एकाहं जीवितं सेय्यो, सीलवन्तस्स झायिनो॥

दुश्शील रहकर असमाहित रहकर सौ वर्ष जीने की अपेक्षा शीलवान होकर ध्यान करते हुए एक दिन भी जीना श्रेयस्कर है।

Better than a hundred years lived without virtue, uncentered, is one day lived by a virtuous person absorbed in jhana.

१११.
यो च वस्ससतं जीवे, दुप्पञ्‍ञो असमाहितो।
एकाहं जीवितं सेय्यो, पञ्‍ञवन्तस्स झायिनो॥

प्रज्ञाहीन व असमाहित रहकर सौ वर्ष जीने की अपेक्षा प्रज्ञावन्त होकर ध्यान करते हुए एक दिन भी जीना श्रेयस्कर है।

And better than a hundred years lived undiscerning, uncentered, is one day lived by a discerning person absorbed in jhana.

११२.
यो च वस्ससतं जीवे, कुसीतो हीनवीरियो।
एकाहं जीवितं सेय्यो, वीरियमारभतो दळ्हं॥

निष्क्रिय और अनुत्साही रहकर सौ वर्ष जीने की अपेक्षा उत्साह और दृढ़ता के साथ एक दिन भी जीना श्रेयस्कर है।

And better than a hundred years lived apathetic & unenergetic, is one day lived energetic & firm.
११३.
यो च वस्ससतं जीवे, अपस्सं उदयब्बयं।
एकाहं जीवितं सेय्यो, पस्सतो उदयब्बयं॥

चीजों के उदय और अस्त को देखे बिना सौ साल जीने की अपेक्षा उदय और अस्त को देखते हुए एक दिन जीना श्रेयस्कर है।

And better than a hundred years lived without seeing arising & passing away, is one day lived seeing arising & passing away.
११४.
यो च वस्ससतं जीवे, अपस्सं अमतं पदं।
एकाहं जीवितं सेय्यो, पस्सतो अमतं पदं॥

अमरत्व की स्थिति को  देखे बिना सौ साल जीने की अपेक्षा अमरत्व की स्थिति को देखते हुए एक दिन जीना श्रेयस्कर है।

And better than a hundred years lived without seeing the Deathless state, is one day lived seeing the Deathless state.

११५.
यो च वस्ससतं जीवे, अपस्सं धम्ममुत्तमं।
एकाहं जीवितं सेय्यो, पस्सतो धम्ममुत्तमं॥

श्रेष्ठ धर्म को देखे बिना सौ साल जीने की अपेक्षा श्रेष्ठ धर्म को  देखते हुए एक दिन जीना श्रेयस्कर है।

And better than a hundred years lived without seeing the ultimate Dhamma, is one day lived seeing the ultimate Dhamma.

सहस्सवग्गो अट्ठमो निट्ठितो।
translated from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight, 29 April 2012,http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.08.than.html . Retrieved on 18 February 2013.

हिन्दी अनुवाद : राजीव

Sunday, February 17, 2013

अरहन्तवग्गो



९०.
गतद्धिनो विसोकस्स, विप्पमुत्तस्स सब्बधि।
सब्बगन्थप्पहीनस्स, परिळाहो न विज्‍जति॥

जिसने अपनी यात्रा पूरी कर ली है, जो शोक रहित है, जो सब तरह से मुक्त हो गया है, जिसने सभी बन्धनों का त्याग किया है-  उसके भीतर कोई दाह (ताप,दुख,चिन्ता, बेचैनी) नहीं रहता।
In one who has gone the full distance, is free from sorrow, is fully released in all respects, has abandoned all bonds: no fever is found.

९१.

उय्युञ्‍जन्ति सतीमन्तो, न निकेते रमन्ति ते।

हंसाव पल्‍ललं हित्वा, ओकमोकं जहन्ति ते॥

वे हमेशा सजग रहते हैं और अपना घर छोड़ देते हैं, उन्हें घर अच्छा नहीं लगता। जैसे हंस झील छोड़कर उड़ जाते हैं वैसे ही वे हर प्रकार का आश्रय त्याग देते  हैं। 
The mindful keep active,  don't delight in settling back. They renounce every home, every home, like swans taking off from a lake.

९२.
येसं सन्‍निचयो नत्थि, ये परिञ्‍ञातभोजना।
सुञ्‍ञतो अनिमित्तो च, विमोक्खो येसं गोचरो।
आकासे व सकुन्तानं [सकुणानं (क॰)], गति तेसं दुरन्‍नया॥

जो संचय नहीं करते, जो भोजन के संबंध में समझदार हैं, जो शून्यता और अनिमित्त (लक्षणहीन) मुक्ति का स्वाद लेते हैं, आकाश में पक्षी के मार्ग की तरह उनका मार्ग नहीं दिखता।
Not hoarding, having comprehended food, their pasture — emptiness & freedom without sign: their trail, like that of birds through space, can't be traced.

९३.
यस्सासवा परिक्खीणा, आहारे च अनिस्सितो।
सुञ्‍ञतो अनिमित्तो च, विमोक्खो यस्स गोचरो।
आकासे व सकुन्तानं, पदं तस्स दुरन्‍नयं॥

जिनके आश्रव (विकार) क्षीण हो गये हैं, आहार के संबंध में जिनमें कोई लालसा नहीं है, जो शून्यता और अनिमित्त (लक्षणहीन) मुक्ति का स्वाद लेते हैं, आकाश में पक्षी के मार्ग की तरह उनका मार्ग नहीं दिखता।

Effluents ended, independent of nutriment, their pasture — emptiness & freedom without sign: their trail, like that of birds through space, can't be traced.

९४.
यस्सिन्द्रियानि समथङ्गतानि [समथं गतानि (सी॰ पी॰)], अस्सा यथा सारथिना सुदन्ता।
पहीनमानस्स अनासवस्स, देवापि तस्स पिहयन्ति तादिनो॥

 सारथि द्वारा सुप्रशिक्षित अश्व की तरह जिसकी इन्द्रियाँ शान्त हो गयी हैं, जिसने मान त्याग दिया है, जो विकाररहित है, ऐसे व्यक्ति से देवता भी ईर्ष्या करते हैं।
He whose senses are steadied like stallions well-trained by the charioteer, his conceit abandoned, free of effluent, Such: even devas adore him.

९५.
पथविसमो नो विरुज्झति, इन्दखिलुपमो [इन्दखीलूपमो (सी॰ स्या॰ क॰)] तादि सुब्बतो।
रहदोव अपेतकद्दमो, संसारा न भवन्ति तादिनो॥

वह पृथ्वी के समान किसी का विरोध नहीं करता, ऊँचे स्तम्भ की तरह जो दृढ़ है, गहरे झील की तरह कर्दमरहित है- ऐसे व्यक्ति के लिए संसार का उद्भव नहीं होता।
Like the earth, he doesn't react — cultured, Such, like Indra's pillar, like a lake free of mud. For him — Such — there's no traveling on.
९६.
सन्तं तस्स मनं होति, सन्ता वाचा च कम्म च।
सम्मदञ्‍ञा विमुत्तस्स, उपसन्तस्स तादिनो॥

उनका मन शान्त होता है, वचन और कर्म शान्त होता है, सम्यक ज्ञान के कारण जो विमुक्त हैं-  ऐसे व्यक्ति पूरी तरह शान्त हैं। 
Calm is his mind, calm his speech & his deed: one who's released through right knowing, pacified, Such.

९७.
अस्सद्धो अकतञ्‍ञू च, सन्धिच्छेदो च यो नरो।
हतावकासो वन्तासो, स वे उत्तमपोरिसो॥


जो नर श्रद्धाहीन (अंध श्रद्धा नहीं रखता) है,  अकृतज्ञ (जो अकृत अर्थात् निर्वाण को जानता है)  है, सेंधमार (संबंधों का त्याग करने वाला ) है, जिसने (पुनर्जन्म का) अवसर नष्ट कर दिया है, जिसने वमन ( सारी इच्छाओं को त्याग दिया) किया है- वही उत्तम पुरुष है।
The man faithless / beyond conviction ungrateful / knowing the Unmade a burglar / who has severed connections who's destroyed his chances / conditions who eats vomit: / has disgorged expectations: the ultimate person.

९८.
गामे वा यदि वारञ्‍ञे, निन्‍ने वा यदि वा थले।
यत्थ अरहन्तो विहरन्ति, तं भूमिरामणेय्यकं॥

गाँव में हो या अरण्य में. घाटी में हो या मैदान में- जहाँ भी अरहन्त विहार करते हैं वह भूमि रमणीक है।
in village or wilds, valley, plateau: that place is delightful where arahants dwell.

९९.
रमणीयानि अरञ्‍ञानि, यत्थ न रमती जनो।
वीतरागा रमिस्सन्ति, न ते कामगवेसिनो॥

जिन रमणीय वनों में साधरण जन आकर्षित नहीं होते वीतरागी उन वनों में ही रमण करते हैं, वे कामसुख की खोज में नहीं रहते। 

Delightful wilds where the crowds don't delight, those free from passion delight, for they're not searching for sensual pleasures.
अरहन्तवग्गो सत्तमो निट्ठितो।

English translation from the Pali by Thanissaro Bhikkhu. Access to Insight, 29 April 2012,http://www.accesstoinsight.org/tipitaka/kn/dhp/dhp.07.than.html . Retrieved on 17 February 2013.

हिन्दी अनुवाद: राजीव